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Saturday, 13 July 2019

उच्च ,निम्न रक्तचाप ,अत्याधिक पसीना और प्यास आदि रोगों के लिए हस्त मुद्रा , Vyaan Mudra, व्यान मुद्रा

PUSH YOURSELF , BECAUSE NO ONE IS GOING TO DO IT FOR YOU

चेतावनी :-यह सिर्फ सलाह है ! कुछ भी करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें 

उच्च ,निम्न रक्तचाप ,अत्याधिक पसीना और प्यास आदि रोगों के लिए हस्त मुद्रा 
Vyaan Mudra
व्यान मुद्रा 


व्यान मुद्रा  :- 

दोस्तों आज हमारी जीवन शैली कुछ इस तरह की हो चुकी है की हम कई तरह की बीमारियों से घिर चुके हैं , जिन में से रक्त से सम्बंधित बीमारियाँ जैसे की उच्च रक्तचाप,निम्न रक्तचाप ,ज्यादा पसीना आना और ज्यादा प्यास लगाना ! आज हम जानेंगे एक हस्त मुद्रा के बारे में जो आप को इन सभी बीमारियों से बचाएगी ! यह है व्यान मुद्रा  !

व्यान मुद्रा लगाने का तरीका :-  

अपने हाथों  की तर्जनी उंगली ,मध्यमा उंगली के सिरों  को हाथ के अंगूठे के सिरे  से लगायें , बाकी उँगलियाँ  सीधी होनी चाहिए और हथेलियाँ  आकाश की और !

अभ्यास का तरीका :- किसी भी आसान में बैठकर व्यान मुद्रा को लगा लें  आँखें  बंद कर के ॐ का उच्चारण करते रहें ! इसे 10 मिनट तक किया जा सकता है ! रक्तचाप होने पर इसे दिन में बार बार पूरे 50 मीनट  तक कर सकते हैं !

सावधानियाँ  :-  

(क)       इस मुद्रा को खाली पेट ही करें ! खाना खाने के 1 घंटे बाद इसे किया जा सकता है !

लाभ :-

(क)  तर्जनी  उंगली वायु तत्व ,मध्यमा उंगली आकाश का और अंगूठा अग्नि का सूचक है व्यान मुद्रा  के करने शरीर में व्यान वायु संतुलित होती है  !

(ख)  पेशाव ज्यादा आना,पेशाव में घात आना ,पेशाव रुक रुक कर आना ,पेशाव में चीनी आना आदि रोग समाप्त होते हैं !


(ग)   व्यान मुद्रा के नियमित अभ्यास से मधुमेह दूर होता है !

(घ) स्वाधिष्ठान चक्र से सम्बन्ध होने के कारण यह आनंद और सृजनात्मकता  को बढ़ाता है !

(च)   स्वप्नदोष समाप्त होता है  !

(छ )  स्त्रियों के सारे रोग समाप्त होते हैं !

(ज)    रक्तचाप सही होता है !

तो दोस्तों आप को आज का लेख कैसा लगा comment जरूर करें और share  करना ना भूलें !


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Sunday, 7 July 2019

अर्थराइटस ,गैस,घुटने का दर्द और अल्सर जैसी बीमारियों के लिए हस्त मुद्रा Vyaau Mudra वायु मुद्रा

PUSH YOURSELF , BECAUSE NO ONE IS GOING TO DO IT FOR YOU

चेतावनी :-यह सिर्फ सलाह है ! कुछ भी करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें 

अर्थराइटस ,गैस,घुटने का दर्द और अल्सर जैसी बीमारियों के लिए हस्त मुद्रा 
Vyaau Mudra
वायु मुद्रा 


वायु मुद्रा  :- 

दोस्तों हमारे शास्त्रों  में बहुत सी योगमुद्राओं  का उल्लेख है जो हमें कई शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बचाती हैं ,उन में से एक मुद्रा है वायु मुद्रा ,आज हम सीखेंगे वायु मुद्रा  के बारे में ! 

वायु मुद्रा लगाने का तरीका :-  

अपने हाथों  की तर्जनी उंगली के सिरे को हाथ के अंगूठे के निचले हिस्से से लगायें और इसे अंगूठे से धीरे से दबाएँ , बाकी उँगलियाँ  सीधी होनी चाहिए और हथेलियाँ  आकाश की और !

अभ्यास का तरीका :- किसी भी आसान में बैठकर ऊपर बताई मुद्रा को लगा लें  आँखें  बंद कर के ॐ का उच्चारण करते रहें ! इसे 10 मिनट या जब तक लाभ ना मिले तब तक किया जा सकता है !

सावधानियाँ  :-  
(क)      इस मुद्रा को उतना ही करें जितना जरूरी लगे  ! अगर आप इसे दर्द के लिए कर रहे हैं  तो दर्द ख़त्म होने पर इसे ना करें नहीं तो लाभ की जगह हानि हो सकती है !

(ख)  वायु तत्व को बढ़ाने वाली चीजें  जैसे की राजमा , पनीर,दालें आदि खाना काम कर दें !

लाभ :-
(क)  तर्जनी  उंगली वायु तत्व  का और अंगूठा अग्नि का सूचक है वायु मुद्रा के करने से वायु  तत्व घटता  है जिस के वायु से होने वाली बीमारियों में लाभ पहुँचता है !
(ख)  चमड़ी में खुजली और रूखापन दूर होता है  !
(ग)   गठिया का रोग दूर होता है !अगर इस मुद्रा को करने के साथ साथ दिन में तीन लीटर पानी पीना शुरू कर दें तो गठिया का रोग पूरी तरह दूर हो जाएगा !
(घ)   सुषुम्ना नाड़ी में वायु का संचार होता है जिस से चक्रों  के जागरण में सहायता मिलती है !
(च)   रक्त संचार सही होता है ,जिससे हृदय रोग में लाभ होता है !
(छ )  वायु मुद्रा के नियमित अभ्यास से लकवा,साइटिका,गैस का दर्द,जोड़ों का दर्द ,गर्दन व कमर  तथा रीढ़ के अन्य भागों में होने वाले दर्द में चमत्कारिक लाभ होता है |
(ज)   जो लोग आंखे जल्दी जल्दी झपकते हैं उन्हें इस मुद्रा से लाभ होता है!
(झ)   अंगूठा शुक्र गृह का प्रतीक है और तर्जनी गुरु का , वायु  मुद्रा में गुरु  का प्रभाव घटता  है जिससे सुख और यश की प्राप्ति होती है !

तो दोस्तों आप को आज का लेख कैसा लगा comment जरूर करें और share  करना ना भूलें !


                                                     
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Saturday, 22 June 2019

एक आसान सा तरीका जो आप का मोटापा तक कम कर देगा , AGNEE MUDRA ,अग्नि मुद्रा

PUSH YOURSELF , BECAUSE NO ONE IS GOING TO DO IT FOR YOU

चेतावनी :-यह सिर्फ सलाह है ! कुछ भी करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें 

 AGNEE MUDRA
अग्नि मुद्रा 

तत्परं पुरुषख्यातगुणवैतृषण्यं 

इस का अर्थ है आत्मज्ञान होने पर प्रकृति के गुणों में आशा तृष्णा का सर्वथा अभाव " परम वैराग्य" है !अर्थात वैराग्य अभ्यास से घटित होता है ना की लिया जाता है !

अग्नि मुद्रा  :- दोस्तों जैसा की आप को पता है की हम इस स्तम्भ में हाथों  की मुद्राओं  के बारे में सीखते है ! हाथों  की मुद्राएं  कई रोगों  से छुटकारा दिला सकती हैं   ! 
 
Photo by Daniela Ruiz from Pexels
आप ने बहुत से देवी देवताओं  को भी देखा होगा आप पाएंगे उन के हाथ भी किसी न किसी मुद्रा में होते हैं ! कोई  तो कारण होगा इस के पीछे ! हम आधुनिक्ता में इतना खो चुके हैं  की हम अपनी संस्कृति को भूल चुके हैं ! हम यह नहीं सोचते दूर दूर से लोग क्यों भारत आ रहे हैं ? क्या ले जाना चाहते हैं  यहाँ  से ? 

दोस्तों वे सभी जानते हैं  की भारत में क्या है शक्तियों और चमत्कारों का खजाना है यहाँ !तो दोस्तों ना  भूले अपनी विरासत को, खुद सीखें  और दूसरों  को भी सीखाएं , कम से कम इसे share तो कर ही दें  ताकी  दूसरे तो सीखें !

दोस्तों हमारे शास्त्रों  में बहुत सी योगमुद्राओं  का उल्लेख है जो हमें कई शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बचाती हैं ,उन में से एक मुद्रा है अग्नि मुद्रा ,आज हम सीखेंगे अग्नि मुद्रा के बारे में ! 

अग्नि मुद्रा लगाने का तरीका :-  अपने हाथों  की अनामिका के सिरे को हाथ के अंगूठे के निचले हिस्से से लगायें और इसे अंगूठे से धीरे से दबाएँ , बाकी उँगलियाँ  सीधी होनी चाहिए और हथेलियाँ  आकाश की और !

दूसरा तरीका है दोनों हाथों  की मुट्ठी  बनाकर अंगूठों  के सिरों को चित्र में बताये अनुसार मिलाए ! हाथों  की मुट्ठियाँ  धरती की ओर !आप इस अभ्यास को हाथों  को खोलकर भी कर सकते हो, हथेलियाँ  जमीन की तरफ ही रहें !



अभ्यास का तरीका :- किसी भी आसान में बैठकर ऊपर बताई मुद्रा को लगा लें  आँखें  बंद कर के ॐ का उच्चारण करते रहें ! इसे 10 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट तक किया जा सकता है !

सावधानियाँ  :-  
(क)   इसे खाली पेट ही करें !
(ख)   उच्च रक्तचाप बाले इसे ना ही करें !
(ग)   ज्यादा क्रोध बाले इसे ना करें !
(घ)   इसे करते हुए ध्यान को ना भटकायें !
(च)   गैस,बदहज्मी के रोगी इसे ना करें !
(छ)   जिन्हे ज्यादा पसीना आता हो , कफ़ ज्यादा बनता हो   वो इसे ना करें 

लाभ :-
(क)  अनामिका उंगली पृथ्वी का और अंगूठा अग्नि का सूचक है अग्नि मुद्रा के करने से अग्नि तत्व बढ़ता है जिस के कारण भूख अच्छी लगती है !
(ख)  निम्न रक्तचाप ठीक होता है !
(ग)   मोटापा काम होता है !
(घ)   बलगम ,खांसी जैसी समस्याएँ  कम होती हैं !
(च)   निमोनिया की शिकायत दूर होती है !
(छ )  शारीरिक थकान दूर होती है !
(ज)   अंगूठा तिल्ली , पेट को और अनामिका फेफड़ों  और बड़ी आंत पर असर डालती है !अतः अग्नि मुद्रा से पेट,तिल्ली,बदहजमी से जुड़ी  बीमारियाँ  दूर होती है !
(झ)   अंगूठा शुक्र गृह का प्रतीक है और अनामिका सूर्या का , अग्नि मुद्रा में शुक्र का प्रभाव बढ़ता है जिससे नाकारात्मक सोच काम होती है,धन संम्पत्ति और सम्मान मिलता है !

तो दोस्तों आप को आज का लेख कैसा लगा comment जरूर करें और share  करना ना भूलें !


                                                     
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Thursday, 6 June 2019

मोटापे के लिये योग ,Yoga for Fat bally,General Knowledge of yoga

PUSH YOURSELF , BECAUSE NO ONE IS GOING TO DO IT FOR YOU

एक महीने में मोटापा घटायें
Loose Fat in a Month

तीव्रसंवेगानामासन्न:

ऊपर लिखे सूत्र का मतलब है की जिसकी जितनी श्रद्धा हो उतनी ही जल्दी वह लाभ प्राप्त करता है !मतलब जो नित्य नियमित रूप से योग साधना पूरी श्रद्धा के साथ करता है उसे ही लाभ मिलता है ! 

दोस्तों हम बहुत से लोगों  को सुनते हैं की हम ने बहुत कुछ किया पर लाभ नहीं मिला वे सब गलत हैं , हाथ ना आये थु कौड़ी वाली कहावत उन के लिए ही बनी है !  करना कुछ नहीं है और दूसरों  को भी करने नहीं देना है !

दोस्तों अगर आप दिल से योग करेंगे तो लाभ जरूर होगा ! 

आज हम बात करेंगे मोटापे के लिए योग के बारे में ,तो जो योगासन आप को करने हैं  वे निम्न हैं  :

(क)     बज्रासन :  घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। इस दौरान दोनों पैरों के अंगुठों को साथ में मिलाएं और एड़ियों को अलग रखें।अब अपने नितंबों को एड़ियों पर टिकाएं।अब हथेलियां को घुटनों पर रख दें। इस दौरान अपनी पीठ और सिर को सीधा रखें।दोनों घुटनों को आपस में मिलाकर रखें।अब आंखें बंद कर लें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
इस अवस्था में आप पांच से 10 मिनट तक बैठने की कोशिश करें।जितना ज्यादा इसे करेंगे उतना लाभ होगा ,यह आसान खाने के बाद भी किया जा सकता है !

(ख)   सुप्तबज्रासन :  इस आसान के लिए पहले बज्रासन में बैठें  फिर धीरे धीरे पीठ को पीछे ले जाते हुए सर को जमीन से लगा दें  दोनों हाथ सर के पीछे ! स्वास साधारण ! इसे भी आप लगभग १० मिनट तक कर  हो !

इन सब के इलावा रोज रस्सी जरूर कूदें और जब पसीना निकलना शुरू हो जाए तो छोड़ दें , मतलब पसीना निकलने तक रस्सी कूदनी है !अगर बताया हुआ योग रोज करोगे तो चलचित्र में मॉडलों  दिखोगे !

धन्यवाद 

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Wednesday, 22 May 2019

General Knowledge about yoga for health,योग का अर्थ ,हाथों कि मुद्राओं से कई तरह की बीमारियों का इलाज

PUSH YOURSELF , BECAUSE NO ONE IS GOING TO DO IT FOR YOU
General Knowledge about yoga for health  

योग का अर्थ 
योगश्चित्तवृत्तिनिरोध: !! 

चित कि वृत्तियों  को रोक लेना ही योग है !चित का मतलब है मन ! मन ही इच्छाओं का केंद्र है ! जब मन को अपने बस में कर लिया तो सब कुछ संभव  हो गया ! अपनी इच्छाओं को  बस में कर लेना ही योग है ! ठहरे हुए पानी में अपना प्रतिबिम्ब देखा जा सकता है पर अगर पानी में तरंगे उठती रहें तो प्रतिबिम्ब देखना मुश्किल होगा !

अपने आप को जान लेना ही योग है और   तभी  संभव होगा जब में  ठहराव होगा होगा !

आज की यह मुद्रा 
ज्ञान मुद्रा 


हाथों कि मुद्राओं से कई तरह की बीमारियों का इलाज  किया जा सकता है ! याद रखें  की जब कोइ भी मुद्रा  आप कर रहे हों उस में उपयोग में ना होने बाली उंगलियों को सीधा रखें  !


विधी      इस मुद्रा में अपने अंगूठे के अग्रभाग को अपनी तर्जनी उंगली के अग्रभाग से मिलाकर रखें  ! शेष तीनो उंगलियों को सीधा रखें ! हाथों  को अपने घुटनों  पर रखें  और साथ में अपनी हथेलियों को आकाश की तरफ खोल दें !

महत्त्व     अंगूठा  अग्नि तत्व का और तर्जनी उंगली वायु  तत्व का प्रतीक है !  ज्योतिष के अनुसार अंगूठा मंगल ग्रह  और तर्जनी उंगली वृहस्पति ग्रह  का प्रतीक है ! 
अतः  दोनों का मेल से वायु तत्व तथा वृहस्पति का प्रभाव बढ़ता है !अतः  इस मुद्रा से बुद्धि का विकास होता है ! इसी कारण इसे ज्ञान मुद्रा कहते हैं !इस मुद्रा का सीधा प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है , इसे सर्व शिरोमणि मुद्रा भी कहते हैं  !

इस मुद्रा को कहीं  भी और कभी भी किया जा सकता है , इसे जितना ज्यादा करेंगे उतना लाभ होगा !

लाभ   


             (क)    बुद्धि ,समरण शक्ति   विकास 
             (ख)   तनाव मुक्ति
             (ग)    एकाग्रता में वृद्धि    
             (घ)   रोगनिरोधक क्षमता में विकास 
             (च)    सर्व रोग नाशक 
             (छ)    दाँत  तथा त्वचा रोगों  का नाश 
             (ज)    ओज  तेज़  में वृद्धि 
             (झ)    नशामुक्ति 

सावधानियाँ     जहां तक हो सके इस मुद्रा को खाने के या चाय कॉफ़ी लेने के तुरंत बाद   मुद्रा को न करें  ! इसे करते समय किसी तरह की असहजता हो तो इसे न करें ! वात  प्रकृति  वालों को इस मुद्रा का अभ्यास ज्यादा समय तक नहीं करना चाहिए !      


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Monday, 13 May 2019

General Knowledge about yoga for health,योगसाधना,YOGSADHANA SE PRASANNATA KI TARAF


General Knowledge about Yoga for health

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योगसाधना



जो मनुष्य योगसाधना नहीं करता वह अभागा है । योगी तो संकल्प से सृष्टि बना देता है और दूसरों को भी दिखा सकता है । चाणक्य बड़े कूटनीतिज्ञ थे । उनका संकल्प बड़ा जोरदार था । उनके राजा के दरबार में कुमागिरि नामक एक योगी आये । उन्होंने चुनौती के उत्तर में कहा :“मैं सबको भगवान का दर्शन करा सकता हूँ ।”


राजा ने कहा : “कराइए ।”


उस योगी ने अपने संकल्पबल से सृष्टि बनाई और उसमें विराटरुप भगवान का दर्शन सब सभासदों को कराया । 


दोस्तों अगर आप भी मेरी कही गई बातों को अमल में लायेंगे तो निरोगी जीवन ही नहीं , जीवन में वह सब कर पाओगे जो आप करना चाहते थे ! तो लग जाईये और जीवन में नई उमंग और तरंग भरिये !
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